बॉम्बे हाईकोर्ट ने मध्य रेलवे को कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे सुरक्षा क्षेत्र में अतिक्रमण कर बनाई गई अवैध झोपड़ियों को हटाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अतिक्रमण हटाने से पहले झोपड़ियों में रहने वालों को नए सिरे से 30 दिन की नोटिस दी जाए। साथ ही, विस्थापन का सामना करने वाले पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कुर्ला पूर्व के राजीव गांधी नगर में रहने वाले सात लोगों की याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं ने रेलवे की जमीन पर बनी झोपड़ियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को चुनौती दी थी। अदालत ने पाया कि ये झोपड़ियां रेलवे पटरियों के किनारे निर्धारित 10 मीटर के बफर जोन और सुरक्षा क्षेत्र के भीतर स्थित हैं।
पीठ ने कहा, “इस तरह का अतिक्रमण न केवल रेलवे के सुचारु कामकाज में बाधा उत्पन्न करता है बल्कि इन झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की जान को भी खतरे में डालता है।”
रेलवे प्रशासन ने अदालत में दलील दी कि रेलवे लाइन के किनारे बनी अवैध संरचनाएं बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा डालती हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त रखना रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस समस्या के लिए केवल स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
पीठ ने कहा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत शुरू की गई कानूनी कार्यवाही 2022 में अंतिम रूप ले चुकी थी। हालांकि, अदालत ने मध्य रेलवे को निर्देश दिया कि झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई शुरू करने से पहले कब्जाधारियों को परिसर खाली करने के लिए नए सिरे से 30 दिन का नोटिस जारी किया जाए।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर लोग जगह खाली नहीं करते हैं तो रेलवे प्रशासन पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा के साथ बेदखली और झोपड़ियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई कर सकता है। अदालत ने संबंधित पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि कार्रवाई के दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने मुंबई उपनगरीय जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि झोपड़ियों को गिराने से पहले वहां रहने वाले परिवारों की पहचान और उनके सामाजिक-आर्थिक विवरण का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों की जानकारी जुटाना और उनके पुनर्वास की संभावनाओं पर विचार करना है।
पीठ ने प्रत्येक ध्वस्त की गई झोपड़ी के लिए छह महीने तक हर महीने 2,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने का भी निर्देश दिया। इस खर्च को रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के बीच साझा किया जाएगा।
इसके अलावा, जिलाधिकारी और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) को निर्देश दिया गया है कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित लागू सरकारी योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशें। इस प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा करने को कहा गया है।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाए जाने के बाद विस्थापित होने वाले निवासी उसी स्थान पर वैकल्पिक आवास दिए जाने की मांग नहीं कर सकते, जहां से उन्हें हटाया जा रहा है।
